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kavita(hindi) poetry

Socha toh tha..

सोचा तोह था

कि दूर कहीं बादलों को चीर रहे होंगे,
कि कहीं आसमां भी धधक उठेगा मेरे आगमन की ध्वनि से।
सोचा तोह था…
कि नदी को रास्ता और समन्दर की गहराई को भी छू लेंगे
कि मछलियां भी सहम उठेगी मेरे आगमन की ध्वनि से।
सोचा तोह था कि
सबसे शक्तिशाली जीव बनके मनुष्य को भगवान बनादेंगे
कि ईश्वर भी आश्चर्यचकित हो उठेगा मेरी उपलब्धियों
की हानि से
सोचा तोह था..पर सोच उसी बक्से में बंद रेहगई
जिसमें सोचा था
कि एक वायरस को रखकर शोध करेंगे ।

© 2020 Khwabo ka Sapna

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शायरी (shayari) kavita(hindi) poetry

“शाम”

शाम हुई नहीं कि
उनका खेल फिर शुरू होगया
हम गर्म चाय बनाए बैठे हैं
और वो बर्फ मिलाए बैठे हैं।

अब झगड़ा ना हो तो फिर क्या हो
हम जहां मुंह बनाए बैठे हैं
वो वहीं मुंह पे हल्की सी,
मुस्कराहट लाए बैठे हैं।
फिर यही देखकर हम आंखो में
अंगार लाए बैठे हैं,
वहीं ग्लास को होठों के ज़रा पास लाकर
आंखों में वो,
और प्यार लाए बैठे हैं।

और इस तरह हर शाम हम, गरमाए रहते हैं
वहीं बोतल खोले वो शाम से, हमें बेहकाय रहते हैं।

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kavita(hindi) poetry

Karwaan!

A phase when we are Lost in the passion for anything.

© 2020 Khwabo ka Sapna

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Articles kavita(hindi) poetry

Anger

समझ से पहले
भाव, जिनके मस्तिष्क में
करते है विस्फोट
ऐसे थरथराते शब्दों
का तांडव है यह क्रोध ।

तामसिक आहार की तमस
का बुखार है यह क्रोध।
प्रतिशोध से परिपूर्ण
आत्म युद्ध में
अपनी हार है यह क्रोध।

विकार का विमर्श से सस्ता
व्यापार है यह क्रोध।
बुद्धि को अंधकार में छिपाई
इन्द्रियों का बस अहंकार है यह क्रोध।।

© 2020 Khwabo ka Sapna

It’s about anger that’s developed in a mind when emotions lose stablity and control. And it’s very important to learn to maintain this balance between our mind and intellect.

If mind wins, intellect loses in that situation, and when intellect is put in darkness, the soul is wounded and so does the impatient mind who craves for peace or healing(because untrained mind always runs to find solace outside but never settles with just it’s own self) gets angry and anger if remained unchannelised,Mind you, yes unchannelised anger becomes the cause of his suffering and branches of suffering shoots out really fast. And therefore More suffering.

It’s also dependent on the food we take, be it for our stomach to survive or for our thoughts. It’s believed in Ayurveda that We become, what we eat. So watching everytime what we take inside, puts us into the Law of attraction naturally. We take what’s better for us, we are in tranquil state. So Anger is just one part of our incapability of stopping our mind to hijack our intellect. And hence the loss happens. I remember a verse from Bhagwad Geeta(a Hindu Scripture) which has helped me many times to control the imbalance of my emotions and that is :

‘indriyani parany ahur
indriyebhyah param manah
manasas tu para buddhir
yo buddheh paratas tu sah’

TRANSLATION: The working senses are superior to dull matter; mind is higher than the senses; intelligence is still higher than the mind; and he [the soul] is even higher than the intelligence.

It’s our choice that We do a business with reaction which is mind’s natural tendency or response which is intellect’s light , See which’s profitable!

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kavita(hindi) poetry

मां की लाडली

#daughters, #motherdaughterrelation, #wedding, #educationofgirls

छोड़ कलम और समझ ले अब तू
होरही है बूढ़ी तेरी मां।
हाथ पीले और नाग नगाड़ों से
करना है अब कन्या दान ।।

समय बीतता नश्वरता में
किस संघर्ष में लगी है तू?
दिखलाना क्यों उन लोगों को
मान चुके तेरी हार है जों ।
स्त्री तोह सीमित है घर में
तुझे सीमा क्या पानी हैं ?

जिस समाज की कुशलता हेतु
तुझे अपनी योग्यता बढ़ानी हैं
उस समाज में निर्भया जैसी
भिरूता भरी भी कहानी हैं।।

भगवे का अर्थ क्या समझता
ना समझा वह वृद्ध का शूल।
निष्ठुर और भीेषण बन रहा
मानवता के जो है प्रतिकूल।
उस समाज की उन्नती हेतु
निकली है घर छोड़ के आज
कोमल सी गुडिया है मेरी
बनी झांसी की रानी है।।

वापस आजा तैयारी कर
मेंहदी लाल रचाने की
साज श्रृंगार का समय है किन्तु
उठाए बैठी है कलम किताब
याद कर उन निष्कपट श्रमिको को
जिनको अस्थिरता का दिया इंसाफ
किस समाज की प्रेरणा लेकर
चली तू करने धर्म है आज।।

घर गृहस्थी ही लक्ष्य है
ऐसा बना जो रीति रिवाज़
चूल्हा चौका को छोड़ के तू
रचेगी नया इतिहास ?
सफलता के संदेह में रहकर
बन जाएगी हास्य का पात्र
यह तोह लंबी लड़ाई है
मांगती जों बलिदानी है।।

© 2020 Khwabo ka Sapna

छोड़ कलम और समझ ले अब तू
हो रही है बूढी तेरी मां..

#poem, #daughters, #mother

Ps: भगवे means saffron colour , colour of sacrifice service, strength and much more in Indian culture. In India , sages wear this colour who live their life with purity, peace and prayers

If you like this, you can wish to read the reply of the daughter to her mother in next blog post “प्रतिज्ञा” https://wp.me/pbhSfc-5S