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kavita(hindi) poetry

प्रतिज्ञा

This is the reply of the daughter to her mother in my previous blog ‘Maa ki laadli’.

मान लिया कुछ पाखंडी हैं
पर अब भी हैं बहुत निश्छल।
जिनके जीवन के काल चक्र में
माया अबतक ना हुई प्रबल ।।

उनमें से कितनो के पास
ना है पक्का घर मकान
कितनो के बच्चे है भूखे
जीवन जिनका इम्तेहान ।।

उसकी भी तोह बूढ़ी मां है
बैठी जों गलियारे में
मजदूरी करने बेटा जों पहुंचे
सूरज के उजियारे में।।

घर बैठे मेरे प्रयासों को
घोर संघर्ष ना देख तू मां
देखले उस बेटी की दशा जो
निकली करने, घर घर के काम।।

जहां धूम-धाम से निकले डोली
दिए जाएं गाड़ी और हार
उसी का नौकर है वह पिता
दहेज की व्यथा जिसका करे संहार ।।

ऐसी-ऐसी प्रथा से मुक्ति
एक दिन में ना आए गी
एक एक सक्षम कर्मी जुड़ें
तो विषमता भी मिट जाएगी।।

आयेगा वह दिन भी माता
जब तू भी गले लगाएगी
उस बेटी को जो एक दिन
इस देश का मान बढ़ाएगी।।
फिर तू करना तैयारी मेंहदी
लाल रचाने की
अभी हाथ में कलम किताब
देकर तैयारी कर पढ़ाने की।।

© 2020 Khwabo ka Sapna

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मां की लाडली

#daughters, #motherdaughterrelation, #wedding, #educationofgirls

छोड़ कलम और समझ ले अब तू
होरही है बूढ़ी तेरी मां।
हाथ पीले और नाग नगाड़ों से
करना है अब कन्या दान ।।

समय बीतता नश्वरता में
किस संघर्ष में लगी है तू?
दिखलाना क्यों उन लोगों को
मान चुके तेरी हार है जों ।
स्त्री तोह सीमित है घर में
तुझे सीमा क्या पानी हैं ?

जिस समाज की कुशलता हेतु
तुझे अपनी योग्यता बढ़ानी हैं
उस समाज में निर्भया जैसी
भिरूता भरी भी कहानी हैं।।

भगवे का अर्थ क्या समझता
ना समझा वह वृद्ध का शूल।
निष्ठुर और भीेषण बन रहा
मानवता के जो है प्रतिकूल।
उस समाज की उन्नती हेतु
निकली है घर छोड़ के आज
कोमल सी गुडिया है मेरी
बनी झांसी की रानी है।।

वापस आजा तैयारी कर
मेंहदी लाल रचाने की
साज श्रृंगार का समय है किन्तु
उठाए बैठी है कलम किताब
याद कर उन निष्कपट श्रमिको को
जिनको अस्थिरता का दिया इंसाफ
किस समाज की प्रेरणा लेकर
चली तू करने धर्म है आज।।

घर गृहस्थी ही लक्ष्य है
ऐसा बना जो रीति रिवाज़
चूल्हा चौका को छोड़ के तू
रचेगी नया इतिहास ?
सफलता के संदेह में रहकर
बन जाएगी हास्य का पात्र
यह तोह लंबी लड़ाई है
मांगती जों बलिदानी है।।

© 2020 Khwabo ka Sapna

छोड़ कलम और समझ ले अब तू
हो रही है बूढी तेरी मां..

#poem, #daughters, #mother

Ps: भगवे means saffron colour , colour of sacrifice service, strength and much more in Indian culture. In India , sages wear this colour who live their life with purity, peace and prayers

If you like this, you can wish to read the reply of the daughter to her mother in next blog post “प्रतिज्ञा” https://wp.me/pbhSfc-5S

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No Deal!

Hey you all out there, Everyone of you.

You all have your own worth, Protect yourself from letting anyone burn your Essence!

Fight for your cause, reach out to the refinement you want to see in yourself and embrace the support you get from the Universe.!

© 2020 Khwabo ka Sapna

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“Fire and Ice”

© 2020 Khwabo ka Sapna

I like to embrace different emotions of a woman. I truly believe that a woman can turn the tables, mould the rocks, make or break any empire when she comes to realize herself. I belong to a society where since ancient times way back from Indus valley civilization, women(in hindu mythology as Goddess Shakti) or her yonis are worshipped and yet ironically sometimes my eyes tear out when a few masses of society try to pull her down. Even though it exists in our society I wish to cherish and support her divine forms and euphoric aura.

Certainly, she comes to her full potential when she gets support from her men in life be it her father brother husband friend but most importantly she needs support of another divine woman too. And this remains a silent key. Think about it!