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Articles kavita(hindi)

Unlock 1.0

Namaskar!

हवाओं को वश में करना आसान नहीं होता l
135 करोड़ को घर में ठहराना आसान नहीं होता।
बवंडर के बीच नौका पर सवार होकर
उसे चला पाना आसान नहीं होता।
बस्तियों को तूफान से बचा पाना आसान नहीं होता।
घुट रही सांसों को नया जीवन दिला पाना आसान नहीं होता।
अपने प्रिय से बिछड़ जाना आसान नहीं होता।

सूरज की तरह सबको चमकाना आसान नहीं होता ।
हर बगीचे की कलियों को फूल बना पाना आसान नहीं होता।
अपने अतीत को बदल पाना आसान नहीं होता।
हर किरदार को निभा पाना आसान नहीं होता।
कल को आज बना पाना भी आसान नहीं होता।

वैसे तोह सब कुछ समझ आजना यह आसान नहीं होता
पर इतना समझ लो कि “देश को अकेले चला पाना, यह तोह बिल्कुल आसान नहीं होता”।

I am so grateful to everything around me, each one of you who has kept me safe till now, the air around me, my flowers, people who have directly or indirectly come in my zone of influence very single entity who has been supporting each other to fight and survive, I am truly blessed to have them.

Our government is running tirelessly to provide best support to us, and now started to UNLOCK the country in phases. We ought to give them support so that they can work efficiently, let’s realise that everything is for us. The rules, the restrictions, The exemptions, everything is for you and me . So let’s join them to best coordinate,

cause its not so easy to do everything Alone.

Happy UnLock1.0.  Keep healthy. Stay positive and safe. Keep loving!

Police on Duty
Glimpse of the lockdown phases
Movement of stranded people to their homes
Movement of people by foot to their homes, when urban cities where they were working for livelihood, got shut
Unlocking of Transportation services
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kavita(hindi) poetry

Socha toh tha..

सोचा तोह था

कि दूर कहीं बादलों को चीर रहे होंगे,
कि कहीं आसमां भी धधक उठेगा मेरे आगमन की ध्वनि से।
सोचा तोह था…
कि नदी को रास्ता और समन्दर की गहराई को भी छू लेंगे
कि मछलियां भी सहम उठेगी मेरे आगमन की ध्वनि से।
सोचा तोह था कि
सबसे शक्तिशाली जीव बनके मनुष्य को भगवान बनादेंगे
कि ईश्वर भी आश्चर्यचकित हो उठेगा मेरी उपलब्धियों
की हानि से
सोचा तोह था..पर सोच उसी बक्से में बंद रेहगई
जिसमें सोचा था
कि एक वायरस को रखकर शोध करेंगे ।

© 2020 Khwabo ka Sapna

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शायरी (shayari) kavita(hindi) poetry

“शाम”

शाम हुई नहीं कि
उनका खेल फिर शुरू होगया
हम गर्म चाय बनाए बैठे हैं
और वो बर्फ मिलाए बैठे हैं।

अब झगड़ा ना हो तो फिर क्या हो
हम जहां मुंह बनाए बैठे हैं
वो वहीं मुंह पे हल्की सी,
मुस्कराहट लाए बैठे हैं।
फिर यही देखकर हम आंखो में
अंगार लाए बैठे हैं,
वहीं ग्लास को होठों के ज़रा पास लाकर
आंखों में वो,
और प्यार लाए बैठे हैं।

और इस तरह हर शाम हम, गरमाए रहते हैं
वहीं बोतल खोले वो शाम से, हमें बेहकाय रहते हैं।

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kavita(hindi) poetry

Karwaan!

A phase when we are Lost in the passion for anything.

© 2020 Khwabo ka Sapna

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Articles kavita(hindi) poetry

Anger

समझ से पहले
भाव, जिनके मस्तिष्क में
करते है विस्फोट
ऐसे थरथराते शब्दों
का तांडव है यह क्रोध ।

तामसिक आहार की तमस
का बुखार है यह क्रोध।
प्रतिशोध से परिपूर्ण
आत्म युद्ध में
अपनी हार है यह क्रोध।

विकार का विमर्श से सस्ता
व्यापार है यह क्रोध।
बुद्धि को अंधकार में छिपाई
इन्द्रियों का बस अहंकार है यह क्रोध।।

© 2020 Khwabo ka Sapna

It’s about anger that’s developed in a mind when emotions lose stablity and control. And it’s very important to learn to maintain this balance between our mind and intellect.

If mind wins, intellect loses in that situation, and when intellect is put in darkness, the soul is wounded and so does the impatient mind who craves for peace or healing(because untrained mind always runs to find solace outside but never settles with just it’s own self) gets angry and anger if remained unchannelised,Mind you, yes unchannelised anger becomes the cause of his suffering and branches of suffering shoots out really fast. And therefore More suffering.

It’s also dependent on the food we take, be it for our stomach to survive or for our thoughts. It’s believed in Ayurveda that We become, what we eat. So watching everytime what we take inside, puts us into the Law of attraction naturally. We take what’s better for us, we are in tranquil state. So Anger is just one part of our incapability of stopping our mind to hijack our intellect. And hence the loss happens. I remember a verse from Bhagwad Geeta(a Hindu Scripture) which has helped me many times to control the imbalance of my emotions and that is :

‘indriyani parany ahur
indriyebhyah param manah
manasas tu para buddhir
yo buddheh paratas tu sah’

TRANSLATION: The working senses are superior to dull matter; mind is higher than the senses; intelligence is still higher than the mind; and he [the soul] is even higher than the intelligence.

It’s our choice that We do a business with reaction which is mind’s natural tendency or response which is intellect’s light , See which’s profitable!

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kavita(hindi) poetry

प्रतिज्ञा

This is the reply of the daughter to her mother in my previous blog ‘Maa ki laadli’.

मान लिया कुछ पाखंडी हैं
पर अब भी हैं बहुत निश्छल।
जिनके जीवन के काल चक्र में
माया अबतक ना हुई प्रबल ।।

उनमें से कितनो के पास
ना है पक्का घर मकान
कितनो के बच्चे है भूखे
जीवन जिनका इम्तेहान ।।

उसकी भी तोह बूढ़ी मां है
बैठी जों गलियारे में
मजदूरी करने बेटा जों पहुंचे
सूरज के उजियारे में।।

घर बैठे मेरे प्रयासों को
घोर संघर्ष ना देख तू मां
देखले उस बेटी की दशा जो
निकली करने, घर घर के काम।।

जहां धूम-धाम से निकले डोली
दिए जाएं गाड़ी और हार
उसी का नौकर है वह पिता
दहेज की व्यथा जिसका करे संहार ।।

ऐसी-ऐसी प्रथा से मुक्ति
एक दिन में ना आए गी
एक एक सक्षम कर्मी जुड़ें
तो विषमता भी मिट जाएगी।।

आयेगा वह दिन भी माता
जब तू भी गले लगाएगी
उस बेटी को जो एक दिन
इस देश का मान बढ़ाएगी।।
फिर तू करना तैयारी मेंहदी
लाल रचाने की
अभी हाथ में कलम किताब
देकर तैयारी कर पढ़ाने की।।

© 2020 Khwabo ka Sapna

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मां की लाडली

#daughters, #motherdaughterrelation, #wedding, #educationofgirls

छोड़ कलम और समझ ले अब तू
होरही है बूढ़ी तेरी मां।
हाथ पीले और नाग नगाड़ों से
करना है अब कन्या दान ।।

समय बीतता नश्वरता में
किस संघर्ष में लगी है तू?
दिखलाना क्यों उन लोगों को
मान चुके तेरी हार है जों ।
स्त्री तोह सीमित है घर में
तुझे सीमा क्या पानी हैं ?

जिस समाज की कुशलता हेतु
तुझे अपनी योग्यता बढ़ानी हैं
उस समाज में निर्भया जैसी
भिरूता भरी भी कहानी हैं।।

भगवे का अर्थ क्या समझता
ना समझा वह वृद्ध का शूल।
निष्ठुर और भीेषण बन रहा
मानवता के जो है प्रतिकूल।
उस समाज की उन्नती हेतु
निकली है घर छोड़ के आज
कोमल सी गुडिया है मेरी
बनी झांसी की रानी है।।

वापस आजा तैयारी कर
मेंहदी लाल रचाने की
साज श्रृंगार का समय है किन्तु
उठाए बैठी है कलम किताब
याद कर उन निष्कपट श्रमिको को
जिनको अस्थिरता का दिया इंसाफ
किस समाज की प्रेरणा लेकर
चली तू करने धर्म है आज।।

घर गृहस्थी ही लक्ष्य है
ऐसा बना जो रीति रिवाज़
चूल्हा चौका को छोड़ के तू
रचेगी नया इतिहास ?
सफलता के संदेह में रहकर
बन जाएगी हास्य का पात्र
यह तोह लंबी लड़ाई है
मांगती जों बलिदानी है।।

© 2020 Khwabo ka Sapna

छोड़ कलम और समझ ले अब तू
हो रही है बूढी तेरी मां..

#poem, #daughters, #mother

Ps: भगवे means saffron colour , colour of sacrifice service, strength and much more in Indian culture. In India , sages wear this colour who live their life with purity, peace and prayers

If you like this, you can wish to read the reply of the daughter to her mother in next blog post “प्रतिज्ञा” https://wp.me/pbhSfc-5S

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kavita(hindi) poetry

‘दृश्य’

चहकते पक्षियों का गीत
एवं ऋतुओं की बहार ।
वर्षा की ध्वनि एवं
खेतो का मिटटी से मिलन सार ।
यह हवाओं की पुकार एवं ऋतुओं की बहार
ऐसा सलोना सा प्रतीक
मानो देवी देवताओं का त्योहार ।।

समुद्री लहरों की भांति
तट पर स्थिर हो जाने का विचार ।
इस परिवर्तन की श्रेष्ठता
को मानो स्थापित किया इस बार ।।

उत्पीड़ित पशु पक्षियों पर
बहुत हुआ प्रहार ।
अपने कुटुम्ब के आश्रय में
टूटा समस्त जगत का अहंकार ।।

ठंडे पड़े प्राणियों को बनाया आज उदार
मानो ग्रीष्म ऋतु की ऊष्मा से द्रविभूत हुआ
हिमखंडो का भार ।
यह हवाओं की पुकार एवं ऋतुओं की बहार
दिया भिन्न देशों को अभिन्नता का व्यवहार ।।
यह हवाओं की पुकार..

© 2020 Khwabo ka Sapna

Chehekte pakshiyo Ka geet aur rituo ki bahaar
Varsha ki dhuani evam
kheto ka mitti se Milan Saar.
Ye hawao ki pukaar evam rituo ki Bahar
Aisa salona sa prateek maano
Devi deviyo Ka tyohaar.

Samudri lehero ki bhaanti
Tat pe sthir ho Jane Ka vichaar
Is parivartan ki shreshtta
KO maano stathpit kiya is Baar

Utpeedit Pashu pakshiyon par
bht hua prahaar
Apne kutumb k ashray me
Toota samast jagat Ka ahamkaar

Ye hawao ki pukaar.

Thande pare praniyo ko banaya aj udaar
Mano grishm Ritu ki ushma se dravibhoot hua himkhando ka bhaar..
Ye hawao ki pukaar evam rituo ki Bahar
Diya bhinn desho ki abhinnta ka vyavhaar..

#poetry#fightagainstpandemic#humanity#irony#life#positivity

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#emotions

घुटन के इस माहौल में
आसुओं की बारिश ना कर ।
ये उमस भरी हवाएं
हमें थमने ना देंगी।।

© 2020 Khwabo ka Sapna

#moments

All the women and children who are facing violence and abuse in this tough times of lock down due to this outbreak of the pandemic, I pray thaty they be stronger safer and healthier than ever before.

Ghutan ke is maahol me

Aansuoo ki baarish na Kar
Ye umas bhari hawayein

Humne thamne na dengi.

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Memories

यादों का सिलसिला कुछ ऐसा शुरू हुआ कि

हम वो चादर भी धोना छोड़ दिए जिसके तकिए के गिलाफ से आपकी खुशबू आती है

© 2020 Khwabo ka Sapna

Yaado Ka silsila Kuch Aisa shuru hua ki

Hum voh chadar bhi dhona chod diye jiske takiye k gilaaf se aapki Khushboo aati hai

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हृदय

एक तरफ़ पंखे-पंखुड़ियां हैं
एक तरफ़ पसीना।
एक तरफ़ पकवान नाना प्रकार हैं
और एक तरफ़ सूखी थालियां ।
एक वजह है और एक मजबूरी
एक रास्ता है और एक मजदूरी।।
कहीं ज़रूरी बातें हैं, कहीं रातो की नींद अधूरी,
वक़्त कठिन हैं और मामला गंभीर
जहां प्राथना है और बेचैन हृदय की लोरी।।

© 2020 Khwabo ka Sapna

Ek taraf pankhe pankhudiya Hain
Ek taraf paseena.

Ek taraf pakvaan Nana prakaar Hain
Aur ek taraf sukhi thaliyan.

Ek vajah hai aur ek majboori ek rasta hai aur ek majdoori.

Kahin zaroori baatein hai , Kahin raato ki need adhoori

Waqt kathin hai aur maamla gambhir.

Jahan prathrna hai aur bechain hridya ki Lori.

#कविता#poem#emotions#fight againstcorona#toughtimes

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आसमां

कहां तोह बचपन में ये किया करते थे,
वोह किया करते थे बस केह ही रहे थे कि, बचपन के आसमां से ही मुलाकात होगई ।
सितारों का गिनना तोह हुआ ही और
चंदा मामा से भी बात हो गई ।।

© 2020 Khwabo ka Sapna

#quarantine#nature #love

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कहानी

उन पलों की रोशनी
मासूमियत भरी ये शैतानी ।
गहरी वो दोस्ती
नशीली वो जवानी ।
कैसे भूलें,कैसे भूलें
भूल से ही, पर आ ही जाती हैं, याद वो कहानी।।

© 2020 Khwabo ka Sapna

collegedays#nostalgia#quarantine

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Parichay

#quarantinetimes

Aaj fir waqt sath hai,
Aur Apne bhi paas hain
Par iski kya khas baat hai?
Ki, man aaj yun udaas hai?

Uski Jo ek hi aas hai,
Ki us har insaan k paas, ek chain ki saans ha,
Jiski bebas se halaat me,
Uska saahas, vartman ki pyas ha..

Par Haan, ek aisi bhi raat hai,
Aur Apne bhi paas hain,
Unke hasne ki hasi
In kaano Ka raas hai.

Aur aisi bhi baat hai ki baato Ka aabhaav hai..par prashno Ka bahaav hai..

Kaisa prakarti Ka swabhaav hai
Ki khwabo k daud me
aur kaamane k daur mein
Bhaagte logo ko Diya ek tehraav hai..

Par…
In sabhi palo ki
Pehli yeh pehchaan hai
Ki aaj arso baad
Manushye manushyata k paas hai
Aasman zameen key..
Aur toh aur, aaj
Pehli baar, vo aparichit chalrahi saansein is jaan ki,
Jaan kar hi bas paas hai…
Sapna Arora

© 2020 Khwabo ka Sapna

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Go on.

Life is balance of highs and lows, it is focus, effort and execution of the focused effort. its never always the same . “When we do the right things, everything falls at place- a wise man once said it to me”.

It all passes. Good, bad, fear or strength, Nothing is permanent. Live in this moment with equanimity. Rest all the Gods shall see!